श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  1.22.4-5 
ततो वायु: सुखस्पर्शो नीरजस्को ववौ तदा।
विश्वामित्रगतं रामं दृष्ट्वा राजीवलोचनम्॥ ४॥
पुष्पवृष्टिर्महत्यासीद् देवदुन्दुभिनि:स्वनै:।
शङ्खदुन्दुभिनिर्घोष: प्रयाते तु महात्मनि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय धूल रहित, सुहावनी हवा चलने लगी। कमल-नेत्र श्री राम को विश्वामित्र के साथ जाते देख देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की। दिव्य नगाड़े बजने लगे। महात्मा श्री राम की यात्रा के समय शंख और नगाड़ों की ध्वनि आने लगी।
 
At that time, a dust-free, pleasant wind started blowing. Seeing lotus-eyed Shri Ram going with Vishwamitra, the gods showered flowers from the sky. The divine drums started playing. During the journey of Mahatma Shri Ram, the sound of conches and drums started coming.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)