श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.22.17 
एतद्विद्याद्वये लब्धे न भवेत् सदृशस्तव।
बला चातिबला चैव सर्वज्ञानस्य मातरौ॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'इन दोनों विद्याओं को प्राप्त करके कोई भी तुम्हारे समान नहीं हो सकता; क्योंकि बल और अतिबला नामक ये विद्याएँ सब प्रकार की विद्याओं की जननी हैं॥17॥
 
'After attaining these two knowledges, no one can be equal to you; because these knowledges named Bala and Atibala are the mother of all kinds of knowledge.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)