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ramayan 1.22.15: ‘तात! रघुकुलनन्दन राम! बल और अतिबला का अभ्यास करने से तीनों लोकों में आपके समान कोई नहीं बचेगा।’ 15॥   |   ramayan सर्ग 1.22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.22.15 
त्रिषु लोकेषु वा राम न भवेत् सदृशस्तव।
बलामतिबलां चैव पठतस्तात राघव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘तात! रघुकुलनन्दन राम! बल और अतिबला का अभ्यास करने से तीनों लोकों में आपके समान कोई नहीं बचेगा।’ 15॥
 
‘Tat! Raghukulnandan Ram! By practicing Bala and Atibala, there will be no one left like you in the three worlds. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)