श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.22.1-2 
तथा वसिष्ठे ब्रुवति राजा दशरथ: स्वयम्।
प्रहृष्टवदनो राममाजुहाव सलक्ष्मणम्॥ १॥
कृतस्वस्त्ययनं मात्रा पित्रा दशरथेन च।
पुरोधसा वसिष्ठेन मंगलैरभिमन्त्रितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वशिष्ठजी के ऐसा कहने पर राजा दशरथ का मुख हर्ष से खिल उठा। उन्होंने स्वयं लक्ष्मण सहित श्रीराम को अपने पास बुलाया। फिर माता कौशल्या, पिता दशरथ और पुरोहित वशिष्ठजी ने स्वस्तिकवाचन करके उनकी यात्रा-सम्बन्धी शुभकार्य सम्पन्न किया - शुभ मन्त्रों द्वारा श्रीराम को आमंत्रित किया गया। 1-2॥
 
When Vashishtha said this, King Dasharatha's face lit up with joy. He himself called Shri Ram along with Lakshman to him. Then mother Kausalya, father Dasharatha and priest Vashishtha, after reciting Swastika, completed the auspicious work related to his journey – Shri Ram was invited with auspicious mantras. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)