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ramayan 1.21.12: 'देवता, ऋषि, राक्षस, गन्धर्व, यक्ष, किन्नर और बड़े-बड़े सर्प भी उनके प्रभाव को नहीं जानते ॥12॥   |   ramayan सर्ग 1.21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.21.12 
न देवा नर्षय: केचिन्नामरा न च राक्षसा:।
गन्धर्वयक्षप्रवरा: सकिन्नरमहोरगा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'देवता, ऋषि, राक्षस, गन्धर्व, यक्ष, किन्नर और बड़े-बड़े सर्प भी उनके प्रभाव को नहीं जानते ॥12॥
 
'Gods, sages, demons, Gandharvas, Yakshas, ​​eunuchs and even big snakes do not know their effects. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)