Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.21.11: वह तीनों लोकों में स्थित जड़-चेतन सहित नाना प्रकार के समस्त अस्त्र-शस्त्रों को जानता है। मेरे अतिरिक्त न तो कोई दूसरा उन्हें भलीभाँति जानता है, न कोई दूसरा कभी जान सकेगा॥ 11॥ | ramayan सर्ग 1.21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एषोऽस्त्रान् विविधान् वेत्ति त्रैलोक्ये सचराचरे।
नैनमन्य: पुमान् वेत्ति न च वेत्स्यन्ति केचन॥ ११॥
अनुवाद
वह तीनों लोकों में स्थित जड़-चेतन सहित नाना प्रकार के समस्त अस्त्र-शस्त्रों को जानता है। मेरे अतिरिक्त न तो कोई दूसरा उन्हें भलीभाँति जानता है, न कोई दूसरा कभी जान सकेगा॥ 11॥
‘He knows all the different types of weapons present in the three worlds, including the animate and inanimate creatures. No other person apart from me knows them well, nor will anyone else ever know them.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥