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ramayan 1.20.5: 'मैं स्वयं हाथ में धनुष लेकर युद्धभूमि में उपस्थित रहकर तुम्हारे यज्ञ की रक्षा करूँगा तथा जब तक इस शरीर में प्राण रहेंगे, तब तक राक्षसों के साथ युद्ध करता रहूँगा॥5॥   |   ramayan सर्ग 1.20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.20.5 
अहमेव धनुष्पाणिर्गोप्ता समरमूर्धनि।
यावत् प्राणान् धरिष्यामि तावद् योत्स्ये निशाचरै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'मैं स्वयं हाथ में धनुष लेकर युद्धभूमि में उपस्थित रहकर तुम्हारे यज्ञ की रक्षा करूँगा तथा जब तक इस शरीर में प्राण रहेंगे, तब तक राक्षसों के साथ युद्ध करता रहूँगा॥5॥
 
'I myself will be at the battlefront with bow in my hand and will protect your sacrifice and will fight with the demons as long as there is life in this body.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)