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ramayan 1.20.24-25h: ब्रह्मन्! मेरा यह पुत्र, जो देवता के समान है, युद्धकला से सर्वथा अनभिज्ञ है। यह अभी बहुत छोटा है; इसलिए मैं इसे किसी भी प्रकार नहीं दूँगा॥ 24 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  1.20.24-25h 
कथमप्यमरप्रख्यं संग्रामाणामकोविदम्॥ २४॥
बालं मे तनयं ब्रह्मन् नैव दास्यामि पुत्रकम्।
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! मेरा यह पुत्र, जो देवता के समान है, युद्धकला से सर्वथा अनभिज्ञ है। यह अभी बहुत छोटा है; इसलिए मैं इसे किसी भी प्रकार नहीं दूँगा॥ 24 1/2॥
 
‘Brahman! This son of mine, who is like a god, is completely ignorant of the art of war. He is still very young; therefore I will not give him away in any way.॥ 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)