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ramayan 1.20.18-19: वह महाबली पुरुष रात्रि में इच्छा होने पर भी स्वयं आकर यज्ञ में विघ्न नहीं डालता (उसे अपने लिए तुच्छ कार्य समझता है); इसलिए उसकी प्रेरणा से मारीच और सुबाहु नामक दो महाबली राक्षस यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करते हैं ॥18-19॥   |   ramayan सर्ग 1.20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  1.20.18-19 
यदा न खलु यज्ञस्य विघ्नकर्ता महाबल:॥ १८॥
तेन संचोदितौ तौ तु राक्षसौ च महाबलौ।
मारीचश्च सुबाहुश्च यज्ञविघ्नं करिष्यत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह महाबली पुरुष रात्रि में इच्छा होने पर भी स्वयं आकर यज्ञ में विघ्न नहीं डालता (उसे अपने लिए तुच्छ कार्य समझता है); इसलिए उसकी प्रेरणा से मारीच और सुबाहु नामक दो महाबली राक्षस यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करते हैं ॥18-19॥
 
‘That mighty man, despite his desire at night, does not come himself and disturb the Yagya (he considers it an insignificant task for himself); Therefore, under his inspiration, two great and powerful demons, Marich and Subahu, create obstacles in the yagyas. 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)