Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.20.15-18h: राजा दशरथ की यह बात सुनकर विश्वामित्र बोले, "महाराज! रावण नाम का एक विख्यात राक्षस है, जो महर्षि पुलस्त्य के कुल में उत्पन्न हुआ है। उसे ब्रह्माजी से अभीष्ट वरदान प्राप्त है; जिससे वह अत्यंत बलवान एवं पराक्रमी होकर असंख्य राक्षसों से घिरा हुआ रात्रि के समय तीनों लोकों के निवासियों को अपार कष्ट दे रहा है। ऐसा सुना जाता है कि राक्षसराज रावण विश्रवा मुनीक का पुत्र और कुबेर का भाई है।" | ramayan सर्ग 1.20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा विश्वामित्रोऽभ्यभाषत॥ १५॥
पौलस्त्यवंशप्रभवो रावणो नाम राक्षस:।
स ब्रह्मणा दत्तवरस्त्रैलोक्यं बाधते भृशम्॥ १६॥
महाबलो महावीर्यो राक्षसैर्बहुभिर्वृत:।
श्रूयते च महाराज रावणो राक्षसाधिप:॥ १७॥
साक्षाद्वैश्रवणभ्राता पुत्रो विश्रवसो मुने:।
अनुवाद
राजा दशरथ की यह बात सुनकर विश्वामित्र बोले, "महाराज! रावण नाम का एक विख्यात राक्षस है, जो महर्षि पुलस्त्य के कुल में उत्पन्न हुआ है। उसे ब्रह्माजी से अभीष्ट वरदान प्राप्त है; जिससे वह अत्यंत बलवान एवं पराक्रमी होकर असंख्य राक्षसों से घिरा हुआ रात्रि के समय तीनों लोकों के निवासियों को अपार कष्ट दे रहा है। ऐसा सुना जाता है कि राक्षसराज रावण विश्रवा मुनीक का पुत्र और कुबेर का भाई है।"
Hearing this from King Dashrath, Vishwamitra said, “Maharaj! There is a famous demon named Ravana, who was born in the family of Maharishi Pulastya. He has received the desired boon from Lord Brahma; Due to which, being very powerful and mighty, surrounded by innumerable demons, he is giving immense trouble to the inhabitants of the three worlds at night. It is heard that the demon king Ravana is the son of Vishrava Munika and the brother of Kubera.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥