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ramayan 1.20.10-11h: 'कुशिकानंदन! मेरी आयु अब साठ हजार वर्ष हो गई है। इस वृद्धावस्था में बड़ी कठिनाई से मुझे पुत्र प्राप्त हुआ है, अतः आप कृपा करके राम को न ले जाएँ।'   |   ramayan सर्ग 1.20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  1.20.10-11h 
षष्टिर्वर्षसहस्राणि जातस्य मम कौशिक॥ १०॥
कृच्छ्रेणोत्पादितश्चायं न रामं नेतुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
'कुशिकानंदन! मेरी आयु अब साठ हजार वर्ष हो गई है। इस वृद्धावस्था में बड़ी कठिनाई से मुझे पुत्र प्राप्त हुआ है, अतः आप कृपा करके राम को न ले जाएँ।'
 
'Kushikanandan! I am 60,000 years old now. In this old age, I have got a son with great difficulty, so please do not take Ram away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)