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श्लोक 1.2.7  |
एवमुक्तो भरद्वाजो वाल्मीकेन महात्मना।
प्रायच्छत मुनेस्तस्य वल्कलं नियतो गुरो:॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| महात्मा वाल्मीकि के ऐसा कहने पर नियमपालक शिष्य भारद्वाज ने अपने गुरु मुनिवर वाल्मीकि को वल्कलवस्त्र प्रदान किया॥7॥ |
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| On this saying of Mahatma Valmiki, the rule-obedient disciple Bhardwaj gave Valkalvastra to his Guru Munivar Valmiki. 7॥ |
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