श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.2.6 
न्यस्यतां कलशस्तात दीयतां वल्कलं मम।
इदमेवावगाहिष्ये तमसातीर्थमुत्तमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! घड़ा यहीं रख दीजिए और मेरी छाल मुझे दे दीजिए। मैं इस उत्तम तामसा तीर्थ में स्नान करूँगा।'
 
'Father! Keep the pitcher here and give me my bark. I will bathe in this excellent tirtha of Tamasa.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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