श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.2.5 
अकर्दममिदं तीर्थं भरद्वाज निशामय।
रमणीयं प्रसन्नाम्बु सन्मनुष्यमनो यथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'भारद्वाज! देखो, यहाँ का घाट बहुत सुंदर है। इस पर कीचड़ का नामोनिशान तक नहीं है। यहाँ का जल किसी सज्जन के मन के समान स्वच्छ है।'
 
‘Bharadwaj! Look, the ghat here is very beautiful. There is no trace of mud on it. The water here is as clean as the mind of a good man. 5.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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