श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.2.41 
तस्य बुद्धिरियं जाता महर्षेर्भावितात्मन:।
कृत्स्नं रामायणं काव्यमीदृशै: करवाण्यहम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इधर शुद्ध हृदयवाले महर्षि वाल्मीकि के मन में यह विचार आया कि मैं सम्पूर्ण रामायणकाव्य को ऐसे ही छंदों में रच दूँ ॥41॥
 
Here, Maharishi Valmiki, who had a pure heart, had this idea in his mind that I should compose the entire Ramayana poem in such verses. 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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