श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.2.4 
स तु तीरं समासाद्य तमसाया मुनिस्तदा।
शिष्यमाह स्थितं पार्श्वे दृष्ट्वा तीर्थमकर्दमम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तमसा के तट पर पहुँचकर और घाट को कीचड़ से रहित देखकर ऋषि ने अपने पास खड़े शिष्य से कहा -॥4॥
 
Reaching the bank of Tamasa and seeing the ghat free from mud the sage said to his disciple standing near him -॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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