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श्लोक 1.2.36-37h  |
यावत् स्थास्यन्ति गिरय: सरितश्च महीतले॥ ३६॥
तावद् रामायणकथा लोकेषु प्रचरिष्यति। |
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| अनुवाद |
| ‘जब तक इस पृथ्वी पर नदियाँ और पर्वत विद्यमान रहेंगे, तब तक रामायण की कथा संसार में फैलती रहेगी ॥36 1/2॥ |
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| ‘As long as rivers and mountains exist on this earth, the story of Ramayana will continue to be spread in the world. ॥ 36 1/2॥ |
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