श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  1.2.35-36h 
न ते वागनृता काव्ये काचिदत्र भविष्यति॥ ३५॥
कुरु रामकथां पुण्यां श्लोकबद्धां मनोरमाम्।
 
 
अनुवाद
'इस काव्य में तुम्हारी कही कोई बात मिथ्या नहीं होगी; इसलिए श्री रामचन्द्रजी की परम पवित्र और सुन्दर कथा को पद्य में लिखो। ॥35 1/2॥
 
'Nothing you say in this poem will be false; therefore, write down the most sacred and beautiful story of Shri Ramchandra in verses. ॥ 35 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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