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ramayan 1.2.29-30h: यह सोचते हुए उन्होंने ब्रह्माजी के समक्ष वही श्लोक दोहराया जो उन्होंने निषाद को लक्ष्य करके क्रौंची की करुण पुकार सुनकर कहा था। उसे दोहराते हुए उन्हें अपने द्वारा दिए गए शाप का अन्याय पुनः स्मरण हो आया। तब वे शोक और चिंता में डूब गए।   |   ramayan सर्ग 1.2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  1.2.29-30h 
शोचन्नेव पुन: क्रौञ्चीमुपश्लोकमिमं जगौ॥ २९॥
पुनरन्तर्गतमना भूत्वा शोकपरायण:।
 
 
अनुवाद
यह सोचते हुए उन्होंने ब्रह्माजी के समक्ष वही श्लोक दोहराया जो उन्होंने निषाद को लक्ष्य करके क्रौंची की करुण पुकार सुनकर कहा था। उसे दोहराते हुए उन्हें अपने द्वारा दिए गए शाप का अन्याय पुनः स्मरण हो आया। तब वे शोक और चिंता में डूब गए।
 
While thinking this, he repeated the same shloka in front of Brahmaji which he had recited after listening to the wailing cry of Kraunchi targeting Nishad. As he repeated it, he again remembered the injustice of the curse given by him. Then he was drowned in grief and worry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)