श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.2.23 
आजगाम ततो ब्रह्मा लोककर्ता स्वयं प्रभु:।
चतुर्मुखो महातेजा द्रष्टुं तं मुनिपुंगवम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इतने में सम्पूर्ण जगत् के रचयिता, सर्वशक्तिमान, परम तेजस्वी चतुर्मुख ब्रह्माजी स्वयं मुनिवर वाल्मीकि से मिलने उनके आश्रम में आये॥23॥
 
Meanwhile, the creator of the entire world, the all-powerful, the most brilliant four-faced Brahmaji himself came to Munivar Valmiki's ashram to meet him. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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