श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.2.21 
भरद्वाजस्तत: शिष्यो विनीत: श्रुतवान् गुरो:।
कलशं पूर्णमादाय पृष्ठतोऽनुजगाम ह॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब उनके विनम्र एवं ज्ञानी शिष्य भारद्वाज भी जल से भरा हुआ घड़ा लेकर गुरुजी के पीछे-पीछे चले॥21॥
 
Then his humble and knowledgeable disciple Bhardwaj also followed Guruji with the pot filled with water. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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