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श्लोक 1.2.21  |
भरद्वाजस्तत: शिष्यो विनीत: श्रुतवान् गुरो:।
कलशं पूर्णमादाय पृष्ठतोऽनुजगाम ह॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| तब उनके विनम्र एवं ज्ञानी शिष्य भारद्वाज भी जल से भरा हुआ घड़ा लेकर गुरुजी के पीछे-पीछे चले॥21॥ |
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| Then his humble and knowledgeable disciple Bhardwaj also followed Guruji with the pot filled with water. 21॥ |
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