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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.2.20 
सोऽभिषेकं तत: कृत्वा तीर्थे तस्मिन् यथाविधि।
तमेव चिन्तयन्नर्थमुपावर्तत वै मुनि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने उस उत्तम तीर्थस्थान में विधिपूर्वक स्नान किया और उसी विषय पर विचार करते हुए आश्रम को लौट आये।
 
Thereafter he took a ritualistic bath in the excellent pilgrimage spot and returned to the Ashrama while thinking about the same matter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)