श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.2.19 
शिष्यस्तु तस्य ब्रुवतो मुनेर्वाक्यमनुत्तमम्।
प्रतिजग्राह संतुष्टस्तस्य तुष्टोऽभवन्मुनि:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
ऋषि का यह उत्तम उपदेश सुनकर उनके शिष्य भरद्वाज अत्यन्त प्रसन्न हुए और उनका समर्थन करते हुए बोले, ‘हाँ, आपका यह वाक्य श्लोकरूप ही होना चाहिए।’ ऋषि अपने शिष्य के इस कथन से अत्यन्त संतुष्ट हुए॥19॥
 
On hearing this excellent advice of the sage, his disciple Bharadwaj was very pleased and supporting him said, 'Yes, this sentence of yours should be in the form of a verse only.' The sage was very satisfied with this statement of his disciple.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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