श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.2.16 
तस्येत्थं ब्रुवतश्चिन्ता बभूव हृदि वीक्षत:।
शोकार्तेनास्य शकुने: किमिदं व्याहृतं मया॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर जब वह विचार करने लगा, तब वह चिंतित हो गया - 'हाय! इस पक्षी के दुःख से पीड़ित होकर मैंने यह क्या कह दिया?'॥16॥
 
Having said this, when he thought over it, he became worried, 'Oh! Being afflicted with the grief of this bird, what have I said?'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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