श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.2.15 
मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगम: शाश्वती: समा:।
यत् क्रौञ्चमिथुनादेकमवधी: काममोहितम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'निषाद! तुम्हें कभी भी शांति न मिले, क्योंकि तुमने बिना कोई अपराध किए ही काम से मोहित हुए इस क्रौंचों के जोड़े में से एक को मार डाला।'॥15॥
 
'Nishad! May you never find peace forever, because you killed one of this pair of kraunchas, who was being tempted by lust, without committing any crime.'॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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