श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.2.13 
तथाविधं द्विजं दृष्ट्वा निषादेन निपातितम्।
ऋषेर्धर्मात्मनस्तस्य कारुण्यं समपद्यत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
निषाद द्वारा मारे गए नर पक्षी की यह दुर्दशा देखकर पुण्यात्मा ॥मुनि को उस पर बड़ी दया आई ॥13॥
 
Seeing the plight of the male bird which had been killed by Nishad, the virtuous sage felt great pity for it. ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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