श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.2.12 
वियुक्ता पतिना तेन द्विजेन सहचारिणा।
ताम्रशीर्षेण मत्तेन पत्त्रिणा सहितेन वै॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर पंखों वाला वह पक्षी अपनी पत्नी के साथ सदैव विचरण करता था। उसके माथे का रंग ताँबे के समान लाल था और वह काम-मत्त था। ऐसे पति से वियोग में क्रौंचि महान शोक से रो रहा था॥12॥
 
That bird with beautiful feathers always roamed along with his wife. The colour of his forehead was red like copper and he was intoxicated with lust. Being separated from such a husband, Kraunchi was crying in great sorrow.॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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