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ramayan 1.19.8-9h: 'क्योंकि वह नियम ऐसा है कि उसके लागू होने के बाद किसी को शाप नहीं मिलता। इसलिए हे राजनश्रेष्ठ! आप मुझे अपने ज्येष्ठ पुत्र श्री राम दीजिए, जो कौए के पंख धारण करने वाले, सत्यवादी और पराक्रमी हैं।'   |   ramayan सर्ग 1.19: विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 19: विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  1.19.8-9h 
तथाभूता हि सा चर्या न शापस्तत्र मुच्यते।
स्वपुत्रं राजशार्दूल रामं सत्यपराक्रमम्॥ ८॥
काकपक्षधरं वीरं ज्येष्ठं मे दातुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
'क्योंकि वह नियम ऐसा है कि उसके लागू होने के बाद किसी को शाप नहीं मिलता। इसलिए हे राजनश्रेष्ठ! आप मुझे अपने ज्येष्ठ पुत्र श्री राम दीजिए, जो कौए के पंख धारण करने वाले, सत्यवादी और पराक्रमी हैं।'
 
'Because that rule is such that no one is cursed after it is started. Therefore, O best of kings! Please give me your eldest son Shri Ram who wears the wings of a crow, is truthful and valiant. 8 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)