Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.19.2: राजसिंह! ये वचन तुम्हारे ही योग्य हैं। इस पृथ्वी पर किसी और के मुख से ऐसे उदार वचन निकलने की संभावना नहीं है। क्यों न हो, तुम तो महान कुल में जन्मे हो और वसिष्ठ जैसे ब्रह्मर्षि तुम्हारे गुरु हैं॥ 2॥ | ramayan सर्ग 1.19: विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजसिंह! ये वचन तुम्हारे ही योग्य हैं। इस पृथ्वी पर किसी और के मुख से ऐसे उदार वचन निकलने की संभावना नहीं है। क्यों न हो, तुम तो महान कुल में जन्मे हो और वसिष्ठ जैसे ब्रह्मर्षि तुम्हारे गुरु हैं॥ 2॥
Rajasingh! These words are worthy of you only. There is no possibility of such generous words coming from the mouth of anyone else on this earth. Why not, you are born in a great family and a Brahmarshi like Vasishtha is your teacher.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥