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ramayan 1.19.17-18h: मैं राम को अपने साथ ले जाना चाहता हूँ। वे भी बड़े हो गए हैं और आसक्ति से रहित हो गए हैं; अतः आप कृपा करके यज्ञ के शेष दस दिनों के लिए अपने पुत्र कमलनेत्र श्री राम को मुझे दे दीजिए॥ 17 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.19: विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 19: विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  1.19.17-18h 
अभिप्रेतमसंसक्तमात्मजं दातुमर्हसि॥ १७॥
दशरात्रं हि यज्ञस्य रामं राजीवलोचनम्।
 
 
अनुवाद
मैं राम को अपने साथ ले जाना चाहता हूँ। वे भी बड़े हो गए हैं और आसक्ति से रहित हो गए हैं; अतः आप कृपा करके यज्ञ के शेष दस दिनों के लिए अपने पुत्र कमलनेत्र श्री राम को मुझे दे दीजिए॥ 17 1/2॥
 
'I want to take Rama with me. He has also grown up and has become devoid of attachments; therefore, please give me your son, lotus-eyed Sri Rama, for the remaining ten days of the yagya.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)