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ramayan 1.19.12-13h: 'इन रघुनन्दन के अतिरिक्त कोई दूसरा पुरुष उन राक्षसों को मारने का साहस नहीं कर सकता। हे श्रेष्ठ! वे दोनों अभिमानी पापी रात्रि-चक्र में फँस गए हैं; इसलिए महात्मा श्री राम के सामने खड़े नहीं हो सकते। 12 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.19: विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 19: विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  1.19.12-13h 
न च तौ राघवादन्यो हन्तुमुत्सहते पुमान्।
वीर्योत्सिक्तौ हि तौ पापौ कालपाशवशं गतौ॥ १२॥
रामस्य राजशार्दूल न पर्याप्तौ महात्मन:।
 
 
अनुवाद
'इन रघुनन्दन के अतिरिक्त कोई दूसरा पुरुष उन राक्षसों को मारने का साहस नहीं कर सकता। हे श्रेष्ठ! वे दोनों अभिमानी पापी रात्रि-चक्र में फँस गए हैं; इसलिए महात्मा श्री राम के सामने खड़े नहीं हो सकते। 12 1/2॥
 
'Except this Raghunandan, no other man can dare to kill those demons. The best! Those two sinners who were proud of themselves have fallen prey to the nocturnal nocturnal cycle; Therefore, Mahatma cannot stand in front of Shri Ram. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)