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ramayan 1.18.48-49h: फिर वे सब प्रसन्न मन से राजा के दरबार में गये और उनसे पूजा पाकर उचित आसन पर बैठ गये।   |   ramayan सर्ग 1.18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  1.18.48-49h 
ते सर्वे हृष्टमनसस्तस्य राज्ञो निवेशनम्॥ ४८॥
विविशु: पूजितास्तेन निषेदुश्च यथार्हत:।
 
 
अनुवाद
फिर वे सब प्रसन्न मन से राजा के दरबार में गये और उनसे पूजा पाकर उचित आसन पर बैठ गये।
 
Then all of them went to the king's court with a happy mind and, being worshipped by him, sat on the appropriate seats.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)