Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.18.46-47h: हे राजन, क्या आपके राज्य की सीमा के निकट रहने वाले शत्रु राजाओं ने आपको प्रणाम किया है? क्या आपने उन पर विजय प्राप्त की है? क्या आपके यज्ञ, यज्ञ आदि धार्मिक कर्तव्य तथा अतिथि सत्कार आदि मानवीय कर्तव्य ठीक प्रकार से निभाए गए हैं?॥46 1/2॥ | ramayan सर्ग 1.18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपि ते संनता: सर्वे सामन्तरिपवो जिता:॥ ४६॥
दैवं च मानुषं चैव कर्म ते साध्वनुष्ठितम्।
अनुवाद
हे राजन, क्या आपके राज्य की सीमा के निकट रहने वाले शत्रु राजाओं ने आपको प्रणाम किया है? क्या आपने उन पर विजय प्राप्त की है? क्या आपके यज्ञ, यज्ञ आदि धार्मिक कर्तव्य तथा अतिथि सत्कार आदि मानवीय कर्तव्य ठीक प्रकार से निभाए गए हैं?॥46 1/2॥
‘O King, have the enemy kings living near the borders of your kingdom bowed down before you? Have you conquered them? Are your religious duties like yajnas, sacrifices etc. and human duties like hospitality to guests etc., performed well, right?’॥ 46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥