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स दृष्ट्वा ज्वलितं दीप्त्या तापसं संशितव्रतम्॥ ४३॥
प्रहृष्टवदनो राजा ततोऽर्घ्यमुपहारयत्।
अनुवाद
विश्वामित्र कठोर व्रत-पालन करने वाले तपस्वी थे। उनके तेज से तेज चमक रहा था। उन्हें देखकर राजा का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा और उन्होंने ऋषि को अर्घ्य अर्पित किया।
Vishwamitra was an ascetic who observed strict fasts. He was glowing with his radiance. Seeing him, the king's face lit up with joy and he offered arghya to the sage. 43 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥