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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 37-39h
 
 
श्लोक  1.18.37-39h 
अथ राजा दशरथस्तेषां दारक्रियां प्रति॥ ३७॥
चिन्तयामास धर्मात्मा सोपाध्याय: सबान्धव:।
तस्य चिन्तयमानस्य मन्त्रिमध्ये महात्मन:॥ ३८॥
अभ्यागच्छन्महातेजा विश्वामित्रो महामुनि:।
 
 
अनुवाद
एक दिन, धर्मात्मा राजा दशरथ अपने पुरोहितों और सम्बन्धियों के साथ अपने पुत्रों के विवाह के विषय में विचार-विमर्श कर रहे थे। जब वे अपने मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श कर रहे थे, तभी महाबली ऋषि विश्वामित्र उनके निवास पर पहुँचे।
 
One day, the virtuous King Dasaratha was discussing the marriage of his sons with his priests and relatives. While he was contemplating among his ministers, the mighty sage Visvamitra arrived at the residence of that great king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)