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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 34-36h
 
 
श्लोक  1.18.34-36h 
ते यदा ज्ञानसम्पन्ना: सर्वे समुदिता गुणै:॥ ३४॥
ह्रीमन्त: कीर्तिमन्तश्च सर्वज्ञा दीर्घदर्शिन:।
तेषामेवंप्रभावाणां सर्वेषां दीप्ततेजसाम्॥ ३५॥
पिता दशरथो हृष्टो ब्रह्मा लोकाधिपो यथा।
 
 
अनुवाद
जब वे सभी बालक बड़े हो गए, तो वे सभी सद्गुणों से संपन्न हो गए। वे सभी विनयशील, यशस्वी, सर्वज्ञ और दूरदर्शी थे। ऐसे पराक्रमी और अत्यंत तेजस्वी पुत्रों को पाकर राजा दशरथ ब्रह्माजी के समान अत्यंत प्रसन्न हुए।
 
When all those children became mature, they were endowed with all the good qualities. All of them were modest, famous, omniscient and farsighted. King Dasharath was very happy like Lord Brahma on getting such powerful and extremely brilliant sons. 34-35 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)