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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  1.18.33-34h 
स चतुर्भिर्महाभागै: पुत्रैर्दशरथ: प्रियै:॥ ३३॥
बभूव परमप्रीतो देवैरिव पितामह:।
 
 
अनुवाद
इन चार भाग्यशाली और प्रिय पुत्रों ने राजा दशरथ को उसी प्रकार प्रसन्न किया, जैसे भगवान ब्रह्मा चार देवताओं (दिक्पालों) पर प्रसन्न होते हैं।
 
These four greatly fortunate and beloved sons brought great pleasure to King Dasaratha, just as Lord Brahma is pleased with the four demigods (Dikpalas).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)