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ramayan 1.18.28-29: लक्ष्मी की वृद्धि करने वाले लक्ष्मण को बचपन से ही श्री रामचन्द्रजी से बड़ा स्नेह था। वे अपने बड़े भाई लोकाभिराम श्री राम से सदैव प्रेम करते थे और शारीरिक रूप से भी उनकी सेवा में लगे रहते थे।   |   ramayan सर्ग 1.18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  1.18.28-29 
बाल्यात् प्रभृति सुस्निग्धो लक्ष्मणो लक्ष्मिवर्धन:॥ २८॥
रामस्य लोकरामस्य भ्रातुर्ज्येष्ठस्य नित्यश:।
सर्वप्रियकरस्तस्य रामस्यापि शरीरत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी की वृद्धि करने वाले लक्ष्मण को बचपन से ही श्री रामचन्द्रजी से बड़ा स्नेह था। वे अपने बड़े भाई लोकाभिराम श्री राम से सदैव प्रेम करते थे और शारीरिक रूप से भी उनकी सेवा में लगे रहते थे।
 
Lakshman, who increased Lakshmi, had great affection for Shri Ramchandraji since childhood. He always loved his elder brother Lokabhiram Shri Ram and was engaged in his service even physically.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)