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ramayan 1.18.24: महर्षि वसिष्ठ ने राजा के द्वारा समय-समय पर उन बालकों के लिए जातकर्म आदि सब संस्कार करवाए थे। उनमें श्री रामचन्द्रजी सबसे ज्येष्ठ थे और अपने कुल की कीर्ति पताका फहराने वाले ध्वज के समान थे। वे ही अपने पिता के सुख को बढ़ाने वाले थे॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 1.18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.18.24 
तेषां जन्मक्रियादीनि सर्वकर्माण्यकारयत्।
तेषां केतुरिव ज्येष्ठो रामो रतिकर: पितु:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महर्षि वसिष्ठ ने राजा के द्वारा समय-समय पर उन बालकों के लिए जातकर्म आदि सब संस्कार करवाए थे। उनमें श्री रामचन्द्रजी सबसे ज्येष्ठ थे और अपने कुल की कीर्ति पताका फहराने वाले ध्वज के समान थे। वे ही अपने पिता के सुख को बढ़ाने वाले थे॥ 24॥
 
Maharishi Vasishtha had got all the rituals like Jaatkaram etc. performed for those children from time to time by the king. Among them, Shri Ramchandraji was the eldest and was like a flag hoisting the flag of glory of his clan. He was the one who increased the happiness of his father.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)