श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.18.17 
जगु: कलं च गन्धर्वा ननृतुश्चाप्सरोगणा:।
देवदुन्दुभयो नेदु: पुष्पवृष्टिश्च खात् पतत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनके जन्म के समय गंधर्वों ने मधुर गीत गाये। अप्सराएँ नाचीं। देवताओं के नगाड़े बजने लगे और आकाश से पुष्प वर्षा होने लगी।
 
At the time of his birth, the Gandharvas sang sweet songs. The Apsaras danced. The drums of the gods started playing and flowers started raining from the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)