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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.18.12 
कौसल्या शुशुभे तेन पुत्रेणामिततेजसा।
यथा वरेण देवानामदितिर्वज्रपाणिना॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे उत्तम वज्ररूपी इन्द्र से देवी अदिति सुशोभित थीं, उसी प्रकार उस अनन्त तेजस्वी पुत्र से रानी कौशल्या अत्यंत सुशोभित थीं॥12॥
 
Queen Kausalya was greatly adorned by that infinitely brilliant son, just as Goddess Aditi was adorned by the excellent thunderbolt Indra. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)