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ramayan 1.17.28: वे चाहें तो आकाश में प्रवेश कर सकते हैं, बादलों को अपने हाथों से पकड़ सकते हैं और यहाँ तक कि वन में तेजी से विचरण करने वाले उन्मत्त हाथियों को भी पकड़ सकते हैं ॥28॥   |   ramayan सर्ग 1.17: ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 17: ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.17.28 
नभस्तलं विशेयुश्च गृह्णीयुरपि तोयदान्।
गृह्णीयुरपि मातंगान् मत्तान् प्रव्रजतो वने॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वे चाहें तो आकाश में प्रवेश कर सकते हैं, बादलों को अपने हाथों से पकड़ सकते हैं और यहाँ तक कि वन में तेजी से विचरण करने वाले उन्मत्त हाथियों को भी पकड़ सकते हैं ॥28॥
 
If they wish, they can enter the sky, catch the clouds with their hands and even capture the mad elephants moving fast in the forest. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)