Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.17.18: उसके बल की कोई सीमा नहीं थी। वह वीर, पराक्रमी था और इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था। वह हाथियों और पर्वतों के समान विशाल और बलवान था॥18॥ | ramayan सर्ग 1.17: ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अप्रमेयबला वीरा विक्रान्ता: कामरूपिण:।
ते गजाचलसंकाशा वपुष्मन्तो महाबला:॥ १८॥
अनुवाद
उसके बल की कोई सीमा नहीं थी। वह वीर, पराक्रमी था और इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकता था। वह हाथियों और पर्वतों के समान विशाल और बलवान था॥18॥
There was no limit to his strength. He was brave, valiant and could assume any form he wished. He was huge and powerful like elephants and mountains.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥