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ramayan 1.16.5: इससे प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने राक्षस को वरदान दिया कि विभिन्न प्राणियों में से उसे मनुष्य के अलावा किसी से भय नहीं रहेगा।   |   ramayan सर्ग 1.16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.16.5 
संतुष्ट: प्रददौ तस्मै राक्षसाय वरं प्रभु:।
नानाविधेभ्यो भूतेभ्यो भयं नान्यत्र मानुषात्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इससे प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने राक्षस को वरदान दिया कि विभिन्न प्राणियों में से उसे मनुष्य के अलावा किसी से भय नहीं रहेगा।
 
Pleased with this, Lord Brahma gave the demon a boon that among the various creatures, he will not fear anyone except human beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)