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ramayan 1.16.31: उस स्वादिष्ट ककड़ी को खाकर राजा की तीनों ऋषि रानियों ने शीघ्र ही अलग-अलग गर्भधारण कर लिया। उनके वे गर्भ अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी थे। 31॥   |   ramayan सर्ग 1.16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.16.31 
ततस्तु ता: प्राश्य तमुत्तमस्त्रियो
महीपतेरुत्तमपायसं पृथक्।
हुताशनादित्यसमानतेजसो-
ऽचिरेण गर्भान् प्रतिपेदिरे तदा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस स्वादिष्ट ककड़ी को खाकर राजा की तीनों ऋषि रानियों ने शीघ्र ही अलग-अलग गर्भधारण कर लिया। उनके वे गर्भ अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी थे। 31॥
 
After eating that delicious cucumber, the three sage queens of the king soon conceived separately. Those wombs of hers were as bright as fire and sun. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)