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ramayan 1.16.30: महाराज की वे सभी धर्मपरायण रानियाँ उनके हाथ से खीर ग्रहण करना अपना गौरव समझती थीं और उनके हृदय अपार हर्ष से भर जाते थे ॥30॥   |   ramayan सर्ग 1.16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.16.30 
ताश्चैवं पायसं प्राप्य नरेन्द्रस्योत्तमस्त्रिय:।
सम्मानं मेनिरे सर्वा: प्रहर्षोदितचेतस:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
महाराज की वे सभी धर्मपरायण रानियाँ उनके हाथ से खीर ग्रहण करना अपना गौरव समझती थीं और उनके हृदय अपार हर्ष से भर जाते थे ॥30॥
 
All those pious queens of the Maharaja considered it an honour to receive that kheer from his hands. Their hearts were filled with immense joy. ॥30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)