Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.16.14-15: उनका रूप सूर्य के समान तेजस्वी था। वे प्रज्वलित अग्नि की लपटों के समान चमक रहे थे। उनके हाथ में जम्बुण्ड नामक तपा हुआ स्वर्ण का एक थाल था, जिस पर चाँदी का ढक्कन लगा हुआ था। वह थाल बहुत बड़ा था और दिव्य खीर से भरा हुआ था। वे पुरुष स्वयं उसे अपनी दोनों भुजाओं में इस प्रकार धारण किए हुए थे, मानो कोई प्रेमी अपनी प्रिय पत्नी को गोद में लिए हुए हो। वह अद्भुत थाल मायावी प्रतीत हो रहा था। 14-15। | ramayan सर्ग 1.16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनका रूप सूर्य के समान तेजस्वी था। वे प्रज्वलित अग्नि की लपटों के समान चमक रहे थे। उनके हाथ में जम्बुण्ड नामक तपा हुआ स्वर्ण का एक थाल था, जिस पर चाँदी का ढक्कन लगा हुआ था। वह थाल बहुत बड़ा था और दिव्य खीर से भरा हुआ था। वे पुरुष स्वयं उसे अपनी दोनों भुजाओं में इस प्रकार धारण किए हुए थे, मानो कोई प्रेमी अपनी प्रिय पत्नी को गोद में लिए हुए हो। वह अद्भुत थाल मायावी प्रतीत हो रहा था। 14-15।
His form was as radiant as the Sun. He was glowing like the flames of a blazing fire. In his hand was a plate made of heated gold called Jambunda, which was covered with a silver lid. That plate was very large and was filled with divine kheer. That man himself was carrying it on both his arms in such a way as if a lover was holding his beloved wife in his arms. That wonderful plate appeared to be illusory. 14-15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥