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ramayan 1.15.8: 'उसने तीनों लोकों के प्राणियों को दुःखी कर दिया है। वह दुष्टात्मा उन लोगों से घृणा करने लगता है जिन्हें वह उच्च पद पर देखता है। वह देवताओं के राजा इंद्र को पराजित करने की इच्छा रखता है।' 8.   |   ramayan सर्ग 1.15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.15.8 
उद्वेजयति लोकांस्त्रीनुच्छ्रितान् द्वेष्टि दुर्मति:।
शक्रं त्रिदशराजानं प्रधर्षयितुमिच्छति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'उसने तीनों लोकों के प्राणियों को दुःखी कर दिया है। वह दुष्टात्मा उन लोगों से घृणा करने लगता है जिन्हें वह उच्च पद पर देखता है। वह देवताओं के राजा इंद्र को पराजित करने की इच्छा रखता है।' 8.
 
‘He has made the creatures of the three worlds miserable. The evil soul starts hating those whom he sees in a higher position. He desires to defeat the king of gods, Indra. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)