श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.15.6 
भगवंस्त्वत्प्रसादेन रावणो नाम राक्षस:।
सर्वान् नो बाधते वीर्याच्छासितुं तं न शक्नुम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'भगवन्! रावण नामक राक्षस आपकी कृपा पाकर अपने बल से हमें बड़ा कष्ट दे रहा है। हममें इतनी शक्ति नहीं है कि हम उसे अपने पराक्रम से दबा सकें।'
 
'Lord! The demon named Ravana, after receiving your blessings, is causing us great trouble with his power. We do not have enough power to suppress him with our might.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)