श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.15.15 
एतच्छ्रुत्वा प्रियं वाक्यं ब्रह्मणा समुदाहृतम्।
देवा महर्षय: सर्वे प्रहृष्टास्तेऽभवंस्तदा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी के कहे हुए इन मधुर वचनों को सुनकर उस समय सब देवता और ऋषिगण अत्यन्त प्रसन्न हुए ॥15॥
 
On hearing these sweet words spoken by Lord Brahma, all the gods and sages became very happy at that time. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)